गहनों से बढाएं अपना सौंदर्य

wearing fashion jewelry tips

आज स्वर्ण-आभूषण का फैशन अपनी पसंद और क्रय-क्षमता पर निर्भर करता है। आभूषणों के डिजाइन की कोई सीमा नहीं, जिसके दिल को जो आभूषण भा गया, उसे ही पहन-लिया। आधुनिकाएं विभिन्न डिजाइन के आभूषण ढूंढ-ढूंढ कर सर्राफों के पास लाती हैं और वैसे ही जेवर बनाने का ‘आर्डर’ देती हैं। उनकी इस मानसिकता को ध्यान में रखते हुए कुछ नयी शैली के आभूषण यहां दिये गये हैं, जो उन्हें बेहद पसंद आयेंगे।

बाजार में उपलब्ध जेवरों में ये डिज़ाइन आपको शायद ही दिखाई दें। फैशन पसंद युवतियों के गहनों में टाप्स, पैडेंट, अंगूठी और हेयर पिन का फैशन है। लाल, नीला, हरा आदि रंग-बिरंगें पत्थरों की मीनाकारी इन आभूषणों की उपयोगिता को और अधिक बढ़ा रही है तथा ये जेवर सभी पोशाकों के साथ चल भी सकते हैं।

आभूषणों के भी रंग निराले होते हैं। विभिन्न डिजाइनों में ब्रेसलेट, अंगूठियां, चूड़ियां, बालियां, टाप्स और सोने की जंजीरें जहां नवीनता की अनुभूति करा रही है वही जेवरों के फैशन का भी बोध सहजता से करा रही है। अलगअलग सेट में प्रस्तुत ये सोने के जेवर वाकई में हर महिला को अपनी ओर आकर्षित करेंगे।

आजकल आधुनिकाओं की खास पसंद ये स्वर्णाभूषण बने हुए हैं। इनमें वर्तमान फैशन के प्रचलित डिज़ाइन इतने सुन्दर ढंग से समाहित हैं कि युवतियां खुद-ब-खुद ही इनके आकर्षण में उलझ जाती हैं।

बालियां, टाप्स; सोने की जंजीरें, अंगूठियां आदि एकं कलात्मक और सुन्दर शैली में बने हुए हैं। इनमें आधुनिकता और प्राचीनता दोनों का ही सुन्दर समन्वय है। पहनिए सुन्दर लगने के लिए।

हानिकारक हो सकते हैं कृत्रिम गहने

विशुद्ध सोने के गहने पहनना ही बुद्धिमानी है। डाक्टरों की राय है कि सस्ते कुंडल, गले के कृत्रिम स्वर्ण हार तथा चूड़ियां पहनने से शरीर पेर खराश पड़ सकती है या एलर्जी हो सकती है।

इन कृत्रिम गहनों में मुख्य अपराधी निकिल धातु होती है, जिसका उपयोग सोना या चांदी का मुल्झा चढ़ाने के लिए किया जाता है जब यह मुल्झा या प्लेटिंग पसीना आदि से रिसने लगती है तो निकिल त्वचा पर असर करने लगती है और यहीं से मुसीबत शुरु हो जाती है।

निकिल का इस्तेमाल गहनों में ही नहीं बल्कि जिपर चेनों, चोलियों के हुकों, धातु के बटनों, चश्मों के फ्रेमों, तथा बेल्ट बकलों आदि में होता है। अनुमान है कि लगभग दस प्रतिशत लोगों को इस धातु से एलर्जी है।

महिलाएं सबसे ज्यादा गहने पहनती हैं, इसलिए उन्हें ही निकिल से सम्बन्धित त्वचा की शिकायत की समस्याएं पैदा हो सकती हैं सामान्यतः कान या गर्दन पर इसका असर होता है और इसलिए इसका पता लगना मुश्किल नहीं है। अंगुलियों पर खराश अंगुठियों में निकिल के कारण होती है, लेकिन इसका कारण धूल या साबुन का अंगूठी तथा त्वचा के बीच जमा हो जाना भी होता है।

ऐसा भी देखा गया है कि महिलाएं होठों पर खराश की शिकायत करती हैं। इसका कारण यह हो सकता है कि वे अपने बालों को काढ़ते समय हेयरपिन को मुँह में लगा लेती हैं। जाहिर है कि पिन में निकिल होता है। जबकि यह अच्छा ही है कि निकिल का सम्पर्क त्वचा से न हो। चोलियों पर हुकों और जिपर इस्तेमाल करते समय निकिल मिली धातु और त्वचा के बीच कपड़े की गद्दी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी तरह धातु के फ्रेमों के बजाये अच्छे किस्म के प्लास्टिक फ्रेम का इस्तेमाल करना लाभदायक है।

निकिल से होने वाली एलर्जी हल्की हो सकती है जो खराश या लाली के रूप में प्रकट होती है, लेकिन यही सूजन या चकत्ते का रूप धारण कर सकती है, जिससे त्वचा रोग बढ़ जाता है।

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