मेकअप टिप्स और सजने-संवरने के साधन

makeup items for ladies hindi

सौंदर्य सज्जा के लिए विभिन्न प्रसाधनों का प्रयोग प्राचीनकाल से होता  आ रहा है, किंतु आधुनिक युग में इनकी संख्या बहुत बढ़ गई है। देसी व विदेशी दोनों प्रकार के प्रसाधनों की विभिन्न किस्में इन दिनों प्रचलन में हैं। प्रत्येक समस्या या उद्देश्य के लिए प्रसाधन विशेष का चयन आवश्यक होता है। त्वचा के अनुरूप उचित और समयानुकूल मेकअप-सामग्री का प्रयोग ही वांछनीय है।

इसके लिए यह जरूरी है कि बाजार में उपलब्ध विभिन्न सामग्रियों की उचित जानकारी व प्रयोग विधि का ज्ञान हो अन्यथा गलत सामग्री का चयन या अनुचित प्रयोग आपके फूहड़पन को प्रदर्शित करेगा। इस संबंध में एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि सदैव विदेशी सामग्री को श्रेष्ठ समझना एक भूल ही है, क्योंकि विदेश के प्रति आपकी इस ललक का अधिकांश दुकानदार अनुचित लाभ उठाकर विदेशी लेबल लगा घटिया (डुप्लीकेट) सामान थमा देते हैं, क्योंकि इससे उन्हें तगड़ा मुनाफा जो मिलता है। दूसरे, प्रायः विदेशी सौंदर्य प्रसाधन भारतीय मौसम व शरीर के अनुकूल नहीं होते।

अतः पूर्ण रूप से उचित नहीं रहते। इन तथाकथित विदेशी प्रसाधनों का मोह त्याग कर अच्छी कंपनियों द्वारा निर्मित देसी प्रसाधनों का चुनाव ही ठीक रहता है। यहां प्रमुख सौंदर्य प्रसाधनों से संबंधित संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत है।

1. कैलामाइन लोशन : हल्का गुलाबी या बादामी रंग व औषधि युक्त यह तरल पदार्थ धूप से झुलसी त्वचा के लिए लाभकारी सिद्ध होता है। यह त्वचा की शुष्कता व खारिश में भी प्रयोग किया जा सकता है।

2. क्लीजिंग मिल्क : दूधिया रंग का यह तरल प्रसाधन मेकअप से पूर्व व रात्रि को सोने से पहले चेहरे की त्वचा की सफाई के लिए प्रयोग में लिया जाता है। इसके प्रयोग से त्वचा पर जमी मैल, धूल व मेकअप के कण साफ हो जाते हैं तथा रोमकूप खुल जाते हैं। हर प्रकार की त्वचा पर इसे रुई के फाए की मदद से इस्तेमाल किया जा सकता है।

3. ब्लीचिंग क्रीम : अनचाहे बालों का भद्दापन दूर करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। इससे बालों का रंग हल्का पड़ जाता है और त्वचा के रंग से मिल जाता है। वे आसानी से दिखाई नहीं पड़ते। चेहरे के बालों के लिए यह विशेष लाभकारी है।

4. ब्यूटी मास्क या फेस मास्क : चेहरे की त्वचा के निखार के लिए इसे इस्तेमाल किया जाता है त्वचा को स्वस्थ रखने में सहायक होता है। चेहरे को अच्छी तरह साफ करके तथा आंखों पर गुलाबजल में भीगे रुई के फाए रखकर मुंह, आंखों, भौंहों को छोड़ते हुए चेहरे पर इसे लेप के रूप में लगाया जाता है। इससे त्वचा कोमल, कांतिवान व स्वच्छ प्रतीत होने लगती है।

5. एस्ट्रीजेंट लोशन : तैलीय त्वचा की चिकनाई पर नियंत्रण पाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। मेकअप से पूर्व व बाद में भी इसे लगाने से मेकअप देर तक टिकता है। इसका इस्तेमाल मुख्यतः चेहरे पर ही करना होता है। यह खुले रोम कूपों को बंद करता है।

6. वैनिशिंग क्रीम : मौसमी उतार-चढ़ाव त्वचा को प्रभावित करते हैं। इससे बचने के लिए त्वचा में आर्द्रता आवश्यक होती है और इस दृष्टि से वैनिशिंग क्रीम गुणकारी रहती है। सामान्य व तैलीय त्वचा के लिए विशेष लाभदायक सिद्ध होती है। चेहरे के श्रृंगार से पूर्व इसे लगाने से श्रृंगार देर तक रुकता है।

7. नॉरिशिंग क्रीम : त्वचा को पौष्टिकता, कोमलता, ताजगी व आकर्षण प्रदान करने के लिए इस क्रीम का प्रयोग उपयोगी रहता है।

8. कोल्ड क्रीम : जैसा कि नाम से संकेत मिलता है, यह क्रीम शीत ऋतु में मुख्य रूप से प्रयोग की जाती है। इसे क्लीनजिंग क्रीम के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। सर्दियों में यह सर्द हवा से त्वचा की रक्षा करती है।

9. क्यूटिकल क्रीम : नाखूनों की जड़ों और क्यूटिकल्स को मजबूती प्रदान करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। इससे क्यूटिकल्स बने रहते हैं तथा नाखूनों से अलग रहकर नाखूनों को बड़ा आकार प्रदान करते हैं। फलस्वरूप वे अधिक सुंदर प्रतीत होते हैं।

10. हैंड क्रीम : हाथों की त्वचा को स्निग्ध बनाने के लिए इस क्रीम का प्रयोग किया जाता है। यह क्रीम हाथों पर असमय झुर्रियां न पड़ने देने में भी सहायक है।

11. टोनर : कलींजर के प्रयोग से त्वचा के जो छिद्र खुले रह जाते हैं, उन्हें बंद करने के लिए तथा त्वचा को स्वाभाविक सौंदर्य प्रदान करने के लिए हल्के टोनर का प्रयोग करना चाहिए। इसका प्रयोग मॉइश्चराइजर की तरह किया जाता है। त्वचा को नवीन शक्ति प्रदान करती है।

12. मॉइश्चराइजर : वातावरण की शुष्कता के कारण त्वचा की प्राकृतिक नमी का वाष्पीकरण होता है। मॉइश्चराइजर इस प्रक्रिया में रुकावट डालकर त्वचा को स्वाभाविक नमी प्रदान करता है।

13. काजल : यह एक ऐसा प्रसाधन है, जिसका प्रयोग प्राचीनकाल से होता आ रहा है। यह आंखों को स्वस्थ व आकर्षण प्रदान करता है। आंखों बड़ी-बड़ी प्रतीत होती हैं। काजल सूखा व क्रीम दोनों रूपों में उपलब्ध होता है। आजकल स्टिक की शक्ल में भी मिलने लगा है। काजल का प्रयोग विशेषतः रात्रि को सोने से पूर्व करते हैं। भूरी या नीली आंखों वाली स्त्रियों के लिए काजल और अधिक जरूरी है। आंखों को उभारने के लिये आवश्यक है।

14. आई ब्रो पेंसिल : भौंहों को सही आकार प्रदान करने तथा हल्की भौंहों को घना दिखाने के लिए इस पेंसिल का प्रयोग किया जाता है। कभीकभी इसे आई लाइनर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।

15. आई लाइनर : यह तरल व शुष्क दोनों रूपों में मिलता है तथा आई लिड के सिरों पर बहुत सावधानीपूर्वक लगाना होता है, जिसके लिए अभ्यास आवश्यक है। तरल लाइनर को ब्रश की सहायता से त्वचा को चौड़ाते हुए लगाना चाहिए। आई लाइनर कई रंगों में उपलब्ध हैं। भूरा व ग्रे रंग का लाइनर दिन के लिए उपयुक्त रहता है। संध्या समय के लिए अन्य रंग।

16. आई शैडो : यह आंखों के श्रृंगार में उल्लेखनीय भूमिका निभाता है। पलकों के बीच वाले स्थान पर इसे लगाने से भौंहें ऊंची प्रतीत होती है। यह विभिन्न रंगों में मिलता है तथा तरल व सूखा दोनों रूपों में लगाने के लिए ब्रश का प्रयोग करना चाहिए।

आई शैडो को आई लैशिज के पास से लगाना आरंभ करके पलकों के मध्य तक फैलाते हैं। कपड़ों के रंगों के आधार पर चयन करना चाहिए।  

17. मस्कारा : आंखों की बरौनियों को घना व आकर्षक दिखाने के लिए इसे प्रयोग करते हैं। यह तरल व शुष्क दोनों रूपों में मिलता है। तरल मस्कारा को लोकेटर की मदद से तथा सूखे को ब्रश से लगाते हैं। मस्कारा कई रंगों में मिलता है। इसके कई कोट लगाने होते हैं।

18. आई मेकअप रिमूवर : जैसा कि नाम से स्पष्ट है। आंखों के मेकअप को हटाने के लिए इसे प्रयोग करते हैं। विशेषकर सोने से पूर्व अन्यथा मेकअप आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

19. आई लेशेज : इन्हें कृत्रिम बरौनियों के रूप में जाना जाता है। जिन महिलाओं की बरौनियां हल्की या छितरी बिखरी सी हों, वे इन्हें प्रयोग कर नेत्राकर्षण बढ़ा सकती हैं। ये लेशेज विभिन्न आकारों व रंगों में मिलती हैं। इन्हें स्वयं लगाया जा सकता है।

20. लिप-पेंट्स या कलर्स : लिप पेंसिल लिपस्टिक व लिप ग्लॉस आदि का इस्तेमाल होठों के श्रृंगार हेतु किया जाता है। पहले लिप पेंसिल से आउट लाइन बनाई जाती है, फिर उस आउट लाइन के अंदर-अंदर लिपस्टिक लगाते हैं तथा बाद में लिप ग्लॉस का लेप चढ़ाते हैं। लिप ग्लॉस तरल व क्रीमी दोनों रूपों में मिलता है।

21. लिप-बैरियर : होठों को फटने से बचाने के लिए तथा कोमलता बनाए रखने हेतु इसका प्रयोग किया जाता है। यह होठों को नमी प्रदान करता है।

22. नेल पॉलिश या इनैमल : विभिन्न रंगों में उपलब्ध इस तरल प्रसाधन का उपयोग नाखूनों को चमक व रंग प्रदान करने हेतु किया जाता है। इसे ब्रश की मदद से लगाना होता है। एक कोट के सूखने पर दूसरा कोट लगाया जाता है।

23. नेल पालिश रिमूवर : इसका प्रयोग नाखूनों से पुरानी नेल पालिश हटाने के लिए किया जाता है। नेल पालिश को पतला बनाने के लिए भी थिनर की तरह इसे इस्तेमाल करते हैं।

24. कृत्रिम नाखून : जिन महिलाओं के नाखून बढ़ते न हों या खराब हो गए हों, वे कृत्रिम नाखून अपना सकती हैं। ये विभिन्न आकार व लंबाई में मिलते हैं तथा नाखूनों पर फिट होकर शोभा बढ़ाते हैं।

25. फेस फाउंडेशन : चेहरे का मेकअप फाउंडेशन के अभाव में अधूरा समझना चाहिए। इससे त्वचा को नया रंग व रूप मिलता है। यह कई रंगों व रूपों में मिलता है, ताकि हर रंग व उम्र की त्वचा से मेल खा सके।

(अ) तरल फाउंडेशन : यह साधारण त्वचा के लिए उपयुक्त रहता है, क्योंकि इसमें चिकनाई प्रदायक पदार्थ मिला होता है, जिससे चमक उभरती है। (चेहरे की बहुत सारी कमियों को छुपा सकते हैं।)

(ब) क्रीम फाउंडेशन : यह सामान्य त्वचा की कमियों को छिपाकर प्राकृतिक छटा प्रदान करता है। फाउंडेशन के रंग के चुनाव के लिए थोड़ा-सा फाउंडेशन अपनी हथेली पर फैलाकर सूखने दें। यदि रंग त्वचा के रंग से मेल खाए, तो ठीक है। फाउंडेशन को अंगुलियों की मदद से समतल लगाना चाहिए। फालतू फाउंडेशन को टिश्यू पेपर या रुई से साफ कर दें। फाउंडेशन चेहरे के अतिरिक्त गर्दन पर भी लगाएं, ताकि वह अलग न दिखे। चेहरे को लंबा कम व चौड़ा ज्यादा दिखाने के लिए जबड़ों पर गहरा फाउंडेशन लगाएं। गालों के गड्डों पर हल्का तथा आसपास गहरा। इससे गालों के गड़े उभरे हुए प्रतीत न होंगे। चौड़े माथे पर फाउंडेशन हल्का लगाएं।

26. कॉम्पैक्ट फेस पाउडर : इसे फाउंडेशन के बाद लगाया जाता है, लेकिन फाउंडेशन के बिना भी प्रयोग किया जा सकता है। इसके मुख्य प्रकार हैं

(अ) जमा हुआ पाउडर : नव यौवनाओं के लिए उपयुक्त रहता है, इससे चेहरे पर मासूमियत झलकती है।

(ब) केक पाउडर : यह तैलीय त्वचा पर तथा कम उम्र की स्त्रियों के लिए उपयोगी रहता है।

(स) मैटी पाउडर : यह पेस्ट की शक्ल में होता है तथा ट्यूब मे मिलता है। इसे खुला नही छोड़ना चाहिए अन्यथा सूख जाएगा। फेस पाउडर का रंग फाउंडेशन व त्वचा के रंग के अनुरूप चुनना चाहिए। इसे सदैव फाउंडेशन सूखने के उपरांत ही लगाएं। गर्दन से लगाना शुरू करके ऊपर तक जाएं, किंतु बालों पर न लगने पाए। लगाने के लिए पफ का प्रयोग करें। फालतू पाउडर टिश्यू पेपर या रुई से पोंछ डालें।

27. रूज : कपोलों पर लालिमा उभारने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। यह भी कई रंगों व रूपों में मिलता है।

(अ) केक रूज : यह शुष्क व सामान्य त्वचा के लिए ठीक रहता है।

(ब) क्रीम रूज : इसे तैलीय त्वचा पर लगाना चाहिए। (स) तरल रूज : – यह हर किस्म की त्वचा पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

गहरे रंग की रूज भद्दी लगती है। प्राकृतिक रंग सर्वोत्तम रहता है।

रूज सावधानी से लगाएं। पहले थोड़ा-सा लगाएं, फिर जरूरत पड़ने पर और लें। अंगुलियों से लगाना ठीक रहता है। रूज एक ही स्थान पर न लगाकर एक सार फैलाएं। दिन में बहुत हल्का रूज लगाएं। अधिक रूज लग जाने पर रुई से साफ कर दें।

28. ब्लशर : यह भी रूज के समान है, बल्कि रूज का आधुनिक रूप है। क्रीम, स्टिक पेंसिल व पाउडर की शक्ल में उपलब्ध है।

29. टेल्कम पाउडर : पसीने की दुर्गंध को दबाने के लिए ग्रीष्म ऋतु में इसे प्रयोग करते हैं। इसे शरीर के आंतरिक भागों में छिड़कते हैं।

30. तरल बिंदी : माथे के श्रृंगार के लिए सुहाग प्रतीक के रूप में बिंदी का प्रचलन प्राचीनकाल से है। इन दिनों तरल बिंदी का प्रचलन काफी है। यह काफी देर तक माथे पर टिकती है। इसे पसीने से बचाना चाहिए।

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