डिओडरेंट का सही इस्तेमाल कैसे करें?

how to put on deodorant correctly

पसीने की दुर्गध से राहत के लिए डिओडरेंट का इस्तेमाल आम है। पर डिओडरेंट का इस्तेमाल करते समय आपके लिए यह जानना भी बेहद जरूरी होता है कि आपके लिए कौन सा डिओडरेंट सही रहेगा और कौन सा नहीं

पसीना आना शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है, जिससे तपती गर्मी में भी शरीर को ठंडक मिलती है और शरीर का तापमान नियंत्रण में रहता है। जहां कुछ लोगों को पसीना सामान्य मात्रा में आता है, वहीं कुछ लोगों को अत्यधिक पसीना आता है। ऐसे लोगों की पसीने की ग्रंथियां ज्यादा सक्रिय होती हैं। यह एक प्रकार का सिंड्रोम होता है, जिसे हाइपरहाइड्रोसिस कहते हैं। इसकी वजह से शरीर से दुर्गंध भी उत्पन्न होती है।

इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए लोग तरह-तरह के तरीके अपनाते हैं। कुछ लोग बार-बार नहते हैं, अपनी डाइट में बदलाव करते हैं, कैफीन, अल्कोहल और मसालों का इस्तेमाल कम करते हैं, जबकि कुछ लोग डिओडरेंट अथवा एंटी-पर्सपिरेंट का इस्तेमाल करते हैं। अंडरआर्म में अत्यधिक पसीना आने की समस्या से निजात के लिए कुछ लोग बोटॉक्स का भी सहारा लेते हैं। इसमें प्योरिफाइड बोटुलिनम टॉक्सिन का इंजेक्शन मामूली मात्रा में अंडरआर्म में दिया जाता है, जिससे पसीना लाने वाली नव्र्ज अस्थायी रूप से ब्लॉक हो जाती हैं और 4 से 6 महीने के लिए पसीने की समस्या से निजात मिल जाती है।

रखें इन बातों का ध्यान

क्या आप सही डिओडरेंट का इस्तेमाल कर रहीं हैं? क्या आप यह जानती हैं कि जो उत्पाद आप इस्तेमाल कर रही हैं उसमें कौन से तत्व मौजूद हैं और इनका आपकी त्वचा पर क्या असर हो सकता है? अगर नहीं जानती तो हम बताते हैं कि डियो का इस्तेमाल करते समय किन बातों का खास ध्यान रखें –

1) हानिकारक केमिकल से रहें

एल्युमिनियम कंपाउंड जैसे कि एल्युमिनियम क्लोराइड वाले डियोडरंट कुछ लोगों की त्वचा में इरिटेशन और एलर्जिक रिएक्शन की वजह बनते हैं, क्योंकि डिओडरेंट में काफी मात्रा में अल्कोहल भी होता है, जो संवेदनशील त्वचा पर बुरा असर डाल सकता है। इसलिए ऐसे डियो से दूर रहें।

2) पैराबींस

यह एक तरह का कृत्रिम प्रिजर्वेटिव है, जिसका इस्तेमाल कॉस्मेटिक्स में काफी ज्यादा मात्रा में होता है। इस केमिकल से स्तन कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। डिओडरेंट में इस्तेमाल होने वाले जिन अन्य केमिकलों की जांच और इनसे बचने की जरूरत होती है वे हैं- प्रॉपलीन आर्टिफिशियल रंग। इसलिए बेहतर है कि आप अल्कोहल-फ्री डिओडरेंट चुनें।

3) तेज खुशबू से करें परहेज

हर किसी के लिए आर्टिफिशियल खुशबू अच्छी नहीं होती। अधिकतर डिओडरेंट में अल्कोहल के साथ खुशबू वाले ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसी कुछ खुशबुएं त्वचा पर कॉस्मेटिक एलर्जी की वजह बन सकती हैं। अगर आपको खुशबू से एलर्जी है तो मंद खुशबू वाले डिओडरेंट चुनें और डिओडरेंट को त्वचा पर छिड़कने के बजाय कपड़ों पर छिड़कें।

4) डिओडरेंट या एंटी-पर्सपिरेंट

क्या आप जानतें हैं डिओडरेंट या एंटी-पर्सपिरेंट में अलग – अलग संयोजन होता है और इनका इस्तेमाल भी अलग – अलग होता है ? एंटी-पर्सपिरेंट ऐसे डिओडरेंट होते है, जो पसीने को बंद करने के लिए पसीने की ग्रंथियों पर काम करते हैं और तब अंडरआर्म की दुर्गध रोकते हैं क्योंकि इनमें खुशबू होती है और त्वचा पर दुर्गध पैदा करने वाले बैक्टीरिया को पनपने से रोकने वाले एंटीबैक्टीरियल तत्व होते हैं।

इसलिए किसी भी प्रकार की खुशबू का इस्तेमाल करने से पहले यह बात जान लें कि आपको एंटी-पर्सपिरेंट की जरूरत है अथवा डिओडरेंट की, क्योंकि यह बात आपके शरीर की जरूरत पर निर्भर करती है। इसलिए अगर आपको अत्यधिक मात्रा में पसीना नहीं आता है लेकिन आपको पसीने की दुर्गंध परेशान करती है तो आपके लिए डिओडरेंट सही चुनाव हो सकता है। दूसरी ओर अगर आपको अत्यधिक पसीने के साथ दुर्गध की समस्या है तो आपके लिए एंटी-पर्सपिरेंट ही सही चुनाव है।

5) स्टिक और स्प्रे

यह आपकी व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर है, जो लोग डिओडरेंट को सीधे त्वचा पर लगाना पसंद करते हैं वे अक्सर स्टिक लेना पसंद करते हैं। वहीं कुछ लोग डिओडरेंट को शर्ट पर स्प्रे करना पसंद करते हैं, तो उन्हें स्प्रे बेहतर लगता है। दोनों का इस्तेमाल आसान होता है। हालांकि, कई बार स्टिक आपके कपड़ों पर धब्बे छोड़ देती हैं। खासतौर से तब जब आपकी ड्रेस का रंग गाढ़ा हो। ऐसे में स्प्रे का प्रयोग बेहतर रहेगा।

 

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*