चेहरे में चार चाँद लगाये- माथे कि बिंदी

Dot Color And Design in hindi beauty tips

चांद-सी चमके माथे की “बिन्दिया’

आप लाख कीमती गहने पहन लें किन्तु ललाट पर बिन्दी या टिकुली न हो तो, चेहरे का आकर्षण धूमिल पड़ जाता है। इसलिए, बिन्दी का चयन करते समय महिलाओं को शारीरिक रंग, चेहरे का आकार, पहने गए पोशाक यानी अपने व्यक्तित्व का पूरा ध्यान रखना चाहिए। तभी आपके चेहरे पर बिन्दी सजेगी। बिन्दी के रंग और डिज़ाइन पर ध्यान नहीं देने पर आपका पूरा व्यक्तित्व ही हास्यपद लगने लगेगा और लोग हंसे बिना नहीं रह पाएंगे |

इसे लगाने के लिए दोनों ओर की भौंहों के बीच ललाट नामक स्थान निश्चित है। इस स्थान को योगशास्त्र में चिन्तन-मनन और ध्यान का केन्द्र स्थल स्वीकार किया गया है। ललाट को भाग्य का प्रतीक भी कहा गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार माथे पर बिन्दी, तिलक या चन्दन लगाना दृढ़ निश्चय, संकल्प का प्रतीक भी माना गया है। बताया जाता है कि प्राचीनकाल में योद्धा रणक्षेत्र में जाने से पूर्व पत्नियों की अंगुली से निकले रक्त से तिलक लगाया करते थे। फिर उसी रक्त से माथे पर बिन्दी लगाकर पत्नियाँ पति के पुनः आगमन की प्रतीक्षा किया करती थीं।

एक अन्य मत के अनुसार देवी माता के तीसरे नेत्र के अनुकरण में दोनों भौंहों के मध्य बिन्दी लगाने का रिवाज़ शुरू हुआ । प्राचीनकाल में केवल विवाहित महिलाएं ही बिन्दी लगाया करती थीं, किन्तु वर्तमान समय में प्रत्येक आयु वर्ग की महिलाओं और बच्चियों को बिन्दी का उपयोग करते देखा जा सकता है, जिसे पुरुषों ने तिलक के रूप में लगाना शुरू किया। यह परंपरा अब भी कायम है। धार्मिक अनुष्ठानों के समय इसे लगाना कर्तव्य और आचरण के एक महत्वपूर्ण अंग के रूप में देखा जा सकता |

बिन्दी के प्रकार : वेल्वेट बिन्दी, तरल बिन्दी का ही महिलाएँ आमतौर से उपयोग करती हैं। वेल्वेट बिन्दी को स्टीकर या चिपकने वाली बिन्दी भी कहा जाता है। इसके माथे पर फैलने का भय नहीं रहता। चाहे चेहरे पर जितना पसीना आये, बस दर्पण के सामने खड़ी हो जाइए और भौंहों के बीच लगा लीजिए। यह बिन्दी तुरन्त खराब नहीं होती, बल्कि दो-तीन दिनों तक सुरक्षित रहती है। ऐसी बिन्दी सस्ती और महंगी दोनों प्रकार की होती हैं, जो अनेक आकार और रंगों में मिलती हैं। किन्तु घटिया किस्म की बिन्दी अधिक समय तक उपयोग करने से माथे पर दाग सा उभर आता है। क्योंकि बिन्दी को चिपकाने के लिए जो रसायन प्रयोग होता है, वह घटिया किस्म का होता है। इससे त्वचा पर उभरने वाली बीमारी को ‘ल्यूकोडरमा’ कहा जाता है।

तरल बिन्दी : जिन महिलाओं को वेल्वेट बिन्दी से  एलर्जी होने लगे, उन्हें सदैव तरी बिन्दी उपयोग करना चाहिए। इसका उपयोग घरेलू, कामकाजी महिलाएं, कॉलेज में पढ़ने वाली युवतियां आसानी से कर सकती हैं। इस प्रकार की बिन्दी भी शीघ्र नहीं फैलती है। तरल बिन्दी के सैट दुकानों पर उपलब्ध हैं। एक सैट में दस छोटी-छोटी शीशियाँ होती हैं, जिनमें अलग-अलग प्रकार के रंग होते हैं, जिसका माहौल और समयानुसार उपयोग किया जा सकता है। ये रंग आपकी पोशाक से आसानी से मैच कर जाते हैं।

आप यदि कलात्मक गुण से संपन्न महिला हैं तो अपने चेहरे और शरीर के रंग के साथ मैच करती हुई बिन्दी छोटे या बड़े आकार में स्वयं डिज़ाइन कर सकती हैं। बिन्दी लगाने के लिए शीशी में एक पतली-सी प्लास्टिक की छड़ होती है, जिससे मनचाहा बिन्दी लगाना आसान होता है। यदि आपके पास समय हो तो स्टीकर बिन्दी के आस-पास तरल बिन्दी के रंगों का उपयोग कर माथे की सुन्दरता को चार चाँद लगा सकती हैं।

यदि तरल बिन्दी मनचाहे रंग में उपलब्ध नहीं हों, या फिर स्टीकर बिन्दी सही आकार-प्रकार में दिखाई नहीं पड़े तो ऐसे समय में आप थोड़ी देर के लिए कपड़े पर कशीदाकारी के लिए उपयोग किये जाने वाले फैब्रिक कलर से भी बिन्दी का काम निकाल सकती हैं। ऐसे रंगों से त्वचा को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचती और त्वचा पर से आसानी से साफ़ भी किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि फैब्रिक्स रंग त्वचा पर एलर्जिक प्रभाव नहीं छोड़ते हैं। बिन्दी की एक और विशेषता यह है कि इससे चेहरे का आकर्षण दुगना हो जाता है। इसलिए, इसे लगाते समय सही स्थान का पूरा ध्यान रखना चाहिए। कारण, बिन्दी को ठीक तरीके से लगाना भी एक कला है। इसमें आपको निपुण होना चाहिए। बिन्दी के उपयोग से माथे के आकार को छोटा या बड़ा दर्शाया जा सकता है। इसके लिए खुले ललाट पर छोटी बिन्दी और छोटे ललाट पर बड़े आकार की बिन्दी लगानी चाहिए। अंडाकार चेहरे पर बहुरंगी बिन्दी अच्छी लगती है।

बिन्दी लगाते समय माथे के अलावा शरीर के रंग का ध्यान भी रखना आवश्यक है। गेहूँए रंग यानी सांवले व्यक्तित्व वाली महिलाओं को कत्थई और लाल रंग की बिन्दी लगानी चाहिए। हल्के सांवले सलोने चेहरे पर बैंगनी और संदली रंग की बिन्दी भी खूब फबती है, जबकि श्याम वर्ण की महिलाओं के माथे पर लाल, गुलाबी, हरे, सिन्दूरी, कचनारी रंगों की बिन्दी आकर्षक लगती है। एकदम गोरी महिला पर काली बिन्दी चार चाँद लगा देती है।

अब तो बिन्दी इतने सारे रंगों और आकार में उपलब्ध हैं कि आप अपनी ड्रेस के अनुसार इनका उपयोग कर सकती हैं और पूरे व्यक्तित्व को मोहक सिद्ध कर सकती हैं। बस आवश्यकता इस बात की है कि आप बिन्दी के चयन से पहले चेहरे के रंग, रूप और आकार पर भी ध्यान दें। चेहरे के आकार के अनुसार बिन्दी चयन की जहाँ तक बात है, पतली भौंहों वाले माथे पर हमेशा छोटी सी बिन्दी लगानी चाहिए। गोल और अंडाकार चेहरे पर एक छोटी बिन्दी के नीचे या ऊपर दो-तीन बिन्दी लगाकर चेहरे की सुन्दरता बढ़ायी जा सकती है।

गोल चेहरे पर पतली लम्बी सी बिन्दी भी लुभाती है। लम्बे और नोंकदार चेहरे पर गोल आकार की बिन्दी अच्छी लगती है। आवश्यकता के अनुसार छोटी-बड़ी, गोल, लम्बी, त्रिभुजाकार, आयताकार बिन्दी हमेशा अच्छी दुकानों से और उच्च क्वालिटी की खरीदनी चाहिए, जिससे माथे पर दाग-धब्बे नहीं उभरें। आप चाहें तो लिपस्टिक के रंगों के अनुसार भी बिन्दी का उपयोग कर सकती हैं। अपनी लिपस्टिक से भी बिन्दी बना सकती हैं। तात्पर्य है कि सदैव बिन्दी का चयन चेहरे की बनावट और रंग के अनुसार करना चाहिए। फिर भला कौन है जो आपकी प्रशंसा न करे और आपकी बिन्दिया में खो न जाए।

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