त्वचा पर झुर्रियां पड़ने की वजह और उपचार

Anti Wrinkle Tips In Hindi Language.

आजकल 19-20 साल की युवतियों को भी झुर्रियों की शिकायत होने लगी है | ऐसा क्यों हो रहा है, आइए जानते हैं-

अनिद्रा, वंशानुगत प्रभाव, खाने की गलत आदत, असंतुलित आहार ही नहीं चेहरे पर जल्दी झुर्रियां पड़ने के और भी कारण हैं । चेहरे पर झुर्रियों का कारण स्कूली दिनों से पढ़ाई के दबाव के साथ शुरू हो जाता है । पढ़ते समय आंखों पर जोर पड़ता है, जिससे सबसे पहले आंखों का निचला हिस्सा प्रभावित होने लगता है । अकसर देर रात तक पढ़ाई करने से नींद पूरी नहीं हो पाती । इससे आंखों के नीचे की त्वचा में काफी तनाव होने लगता है । यहां की त्वचा चेहरे के बाकी हिस्सों की त्वचा से अधिक संवेदनशील और नाजुक होती है । व्यक्ति रोज तकरीबन 10 हजार बार अपनी पलकें झपकाता है । उससे भी आंखों के नीचे की त्वचा पर तनाव पड़ता है । सही मात्रा में पानी नहीं पीने से भी चेहरे की त्वचा उम्र से पहले झुर्रीदार हो जाती है ।

त्वचा का विभाजन

त्वचा विशेषज्ञ के मुताबिक चेहरे की त्वचा की उम्र को 3 भागों में विभक्त किया जा सकता है । पहला है मीयो एजिंग । आजकल ज्यादातर नवयुवतियां मार्केटिंग, ब्यूटी सैलून, एअरहोस्टेस जैसी ग्राहकों से सीधे ताल्लुक रखनेवाली नौकरियों में हैं, जिसमें वे दिन में सैकड़ों ग्राहकों से मिलती हैं । कई बार मुस्कराना या 100-150 बार हेलो कर अभिवादन करती हैं, जिससे उनकी एक्सप्रेशन लाइन यानी आंखों और मुंह के आसपास की कोशिकाएं प्रभावित होती हैं ।

त्वचा की दूसरी अवस्था है प्रोमो एजिंग, यानी 35-40 वर्ष में महिला की त्वचा के ऊतक कमजोर होने लगते हैं, जिससे त्वचा ढीली हो जाती है ।

तीसरी तरह की एजिंग होती है हारमोनल एजिंग । यह शरीर के अंदरूनी हारमोन के बदलाव के कारण होता है । इसे पोस्ट मेनोपोजल एजिंग भी कहते हैं । इसके अंतर्गत त्वचा की पहली परत काफी पतली हो जाती है । चेहरे पर झांइयां होने लगती हैं । इससे त्वचा का रूखापन बढ़ने लगता है । चेहरे की रूपरेखा बदलने लगती है । नाक व गालों की हड्डी आदि में थोड़ा परिवर्तन होने लगता है ।

सामान्य उपाय

त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार 30 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते चेहरे की त्वचा में शुष्कता बढ़ती जाती है | इसके लिए क्लीजिंग, टोनिंग, माइश्चराइजिंग के अलावा हाइड्रेटिंग जरूरी है । हाइड्रेटिंग यानी चेहरे की शुष्कता को खास तौर पर बनायी गयी हाइड्रेटिंग क्रीम लगा कर दूर की जाती है । तनावपूर्ण जीवन के कारण आंखों के नीचे काले घेरे, हल्की सूजन और झुर्रियां हो जाती हैं । इससे बचने के लिए अंडरआई क्रीम का इस्तेमाल करें ।

सनस्क्रीन लोशन

युवतियां सनस्क्रीन लोशन लगाती तो हैं, लेकिन ज्यादातर को इसको इस्तेमाल करने का सही तरीका मालूम नहीं होता है । आप जितनी देर तक धूप में रहती हैं, उसी के मुताबिक एसपीएफ 15, 30, 50 और 60 का प्रयोग करें । यूवीबी सनस्क्रीन लोशन उस तरह की त्वचा के लिए है, जो सूर्य की रोशनी से टैन यानी जल जाती है । यूवीए सनस्क्रीन लोशन उस तरह की त्वचा के लिए है, जिसमें सूर्य की रोशनी के कारण झांइयां हो जाती हैं । गाल और नाक पर भूरे दाग होने लगते हैं । बचाव के लिए आप शुरू से यूवीबी और यूवीए सनस्क्रीन लोशन का प्रयोग करें । एक अच्छे सनस्क्रीन लोशन में दोनों तरह की सुरक्षा मिलती है ।

खानपान का प्रभाव

संतुलित आहार लें । इसमें अनाज और दाल आदि के साथ अंकुरित आहार, हरी सब्जियां, दूध और फल शामिल करें । मौसमी फलों के रस के साथ-साथ 10-12 गिलास पानी रोज पिएं । इससे त्वचा के विषैले तत्व बाहर होंगे और त्वचा में नमी पैदा होगी । दिनभर में 8-9 घंटे की नींद होनी जरूरी है । ये सारी बातें चेहरे की चमक लाने और झुर्रियों को दूर रखने के लिए जरूरी मानी जाती हैं ।

नयी तकनीकियों का बाजार

एक्सपर्ट बताती हैं, ‘‘अलग-अलग तरह की त्वचा पर उम्र दिखने में अलग-अलग वक्त लगता है । जैसे शुष्क त्वचा में झुर्रियां जल्दी पड़ती हैं, जबकि तैलीय त्वचा में देर से पड़ती हैं । आजकल विशेष स्किन टेस्टिंग मशीन द्वारा स्किन टेस्ट किया जाता है, जिसमें चेहरे के किस भाग की त्वचा कैसी है यह आसानी से मालूम हो जाता है । टेस्टिंग मशीन में एक लैपटॉप और एक डर्मोस्कोप होता है । डर्मोस्कोप के जरिए हम त्वचा पर कैमरे को लगाते हैं, जिससे त्वचा की बड़ी और बारीक छवि लैपटॉप के स्क्रीन पर दिखायी देती है । मेलानोमीटर से चेहरे पर झांइयों का स्तर मालूम हो जाता है । चेहरे के प्रभावित हिस्से मालूम हो जाने पर उसका इलाज करने में आसानी होती है ।’ आजकल बाजार में प्रोस्टीन, अतिरिक्त विटामिन सी और बीसा ब्लोर युक्त क्रीम मिलती हैं, जो असमय हुए झांइयों पर काबू पाने में सहायक मानी जाती है । प्रोस्टीन चेहरे की ऊपरी सांवली परत को फिर से जीवंत करता है । झरने के पानी से खास तरह की क्रीम भी तैयार की जा रही है । किसी डर्मोटोलॉजिस्ट की राय ले कर आप इस तरह की क्रीमों का प्रयोग कर सकती हैं ।

क्यों पड़ती हैं झुर्रियां

चेहरा मन की बात को सही बताए या ना बताए, लेकिन आपकी उम्र के बारे में बहुत कुछ बता देता है । उम्र का अंदाजा लगाने में 5-10 साल का मुगालता हो सकता है, पर कुछ-कुछ सचाई तो पता चल ही जाती है । चेहरे की त्वचा में कसावट हो, तो समझो युवा हैं । अगर झुर्रियां पड़ने की शुरुआत हो, तो समझो अधेड़ावस्था की तरफ बढ़ रहे हैं । उम्र के बढ़ने के साथ चेहरे पर झुर्रियां पड़ना स्वाभाविक है ।

हमारी त्वचा 3 परतों से बनी है । ये परतें हैं बाह्य त्वचा (एपिडर्मिस), अंतर त्वचा (डर्मिस) और त्वचा के नीचे के ऊतक (सबकुटेनियस टिशू) ।

बाह्य त्वचा (एपिडमिंस) : यह बाहरी वातावरण से बचाव के लिए ढाल का काम करती है । बाह्य त्वचा की कोशिकाओं को केराटिनोसाइट्स कहते हैं । ये कोशिकाएं बाहरी त्वचा के नीचे से आरंभ हो कर ऊपर की ओर जाती हैं और भारी मात्रा में कैरोटिन का निर्माण करती हैं । जब ये कोशिकाएं ऊपर की परत तक पहुंचती हैं, तो छोटी-छोटी परतों में बंट कर झड़ जाती हैं ।

अंतर त्वचा (डर्मिस) : त्वचा की दूसरी परत अंतर त्वचा कहलाती है । इसमें त्वचा के संरचनात्मक तत्व संयोजी (कनेक्टिव टिशू) ऊतक होते हैं । अलग-अलग संयोजी ऊतक एक-दूसरे से अलग काम करते हैं । उदाहरण के तौर पर कोलेजन त्वचा को मजबूती देती है, ग्लायकोसैमिनोग्लाएकॉन्स नाम की प्रोटीन त्वचा को सख्त बनाती है और इलास्टिन रेशा त्वचा में लचीलापन लाता है ।

अंतर त्वचा और बाह्य त्वचा का संयोजन (डर्मल-एपिडर्मल जंक्शन) : यह एक महत्वपूर्ण संरचना है । यह संयोजन परस्पर जुड़ा है और उंगलियों की तरह बाहर की ओर निकला है । इसे रीटरिज कहते हैं । बाहरी त्वचा की कोशिकाएं अंतर त्वचा की रक्तवाहिनियों से पोषित होती हैं ।

त्वचा के नीचे के ऊतक (सबकुटेनियस टिशू) : यह त्वचा के सबसे नीचे की परत होती है, जिसमें वसा कोशिकाएं होती हैं । ये कोशिकाएं एक तरह से कवच बन कर शरीर की रक्षा करती हैं और त्वचा को भरापूरा बनाए रखती हैं ।

इस तरह पड़ती हैं झुर्रियां : जब किसी व्यक्ति की उम्र बढ़ने लगती है, तो उसकी बाहरी त्वचा की कोशिकाएं पतली हो जाती हैं और उनकी चिपचिपाहट कम हो जाती है । इन पतली कोशिकाओं से त्वचा और भी पतली दिखायी देने लगती है । कोशिकाओं की चिपचिपाहट कम होने पर उसकी ढाल का असर कम होने लगता है । इस तरह नमी त्वचा के अंदर रहने के बजाय बाहर आने लगती है, इससे खुश्की पैदा होती है । बाह्य त्वचा की कोशिकाएं 10 वर्षों में 10 प्रतिशत कम हो जाती हैं । ये कोशिकाएं कम रफ्तार से बंटने लगती हैं । उम्र बढ़ने पर त्वचा के जल्दी से ना बनने के कारण कोशिकाओं के विभाजन की दर कम हो जाती है ।

उम्र बढ़ने का असर अंतर त्वचा पर अधिक पड़ता है । इससे ना केवल त्वचा पतली पड़ जाती है, बल्कि कोलेजन कम बनता है और लचीलापन लानेवाले रेशे खत्म हो  जाते हैं । त्वचा की संरचना में इन बदलावों की वजह से त्वचा में झुर्रियां पड़ने लगती हैं । तेलवाली ग्रंथियां भी बड़ी हो जाती हैं, लेकिन सीबम कम पैदा करती हैं । पसीना पैदा करनेवाली ग्रंथियों की संख्या कम हो जाती है । इस तरह इन दोनों बदलावों से त्वचा खुश्क होने लगती है ।

डर्मल-एपिडर्मल के संयोजन के रीटरिज फैल जाते हैं और इससे त्वचा कमजोर हो कर फट जाती है । इस प्रक्रिया से डर्मिस के साथ संपर्क क्षेत्र में कमी आ जाती है, जिससे बाह्य त्वचा को प्राप्त पोषक तत्वों की मात्रा कम हो जाती है । इससे त्वचा के ठीक होने की सामान्य प्रक्रिया में रुकावट पैदा होती है । उम्र के साथ सबकुटेनियस परत की वसा कोशिकाएं छोटी हो जाती हैं, जिससे चेहरे पर झुर्रियां पड़ जाती हैं और त्वचा झोलदार हो जाती है । दूसरी परतों से होनेवाले नुकसान की पूर्ति वसा कोशिकाएं नहीं कर पातीं |

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