सुपर वुमन सिंड्रोम आपको मुस्किल में दाल सकता है Super Women Syndrome

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सुपर वुमन सिंड्रोम आपको मुस्किल में दाल सकता है Super Women Syndrome – सुपर वुमन बनने की चाहत में अक्सर आज की औरत जरूरत से ज्यादा सक्षम बनने की कोशिश कर रही है. देखा जाए तो यह वह कीड़ा है जो आपके व्यक्तित्व पर सिंड्रोम बनकर छा जाता है, आप चाहे तो इससे बच सकती हैं.

सुपर वुमन बनने के चक्कर में कहीं आप खुद ही तो घनचक्कर नहीं हो रही. जरा सोचिए और फिर कुछ बातों को जिंदगी में जरूर अपनाइए.

जरूरत पड़ने पर अपनी प्रतिक्रिया दें

जो कुछ भी आपके चारों और घट रहा है उसके प्रति अपनी प्रतिक्रिया जरुर प्रकट करें सब कुछ रोबोट की तरह चुपचाप ना स्वीकारी परिवर्तन की प्रक्रिया से उत्पन्न अपनी भावनाओं को स्वीकार करें याद रखें आपकी भावनाओं को आपसे बेहतर कोई नहीं जान सकता

क्षमता से अधिक काम न करें]

घर हो या दफ्तर, अच्छा कहलाने के लिए अपनी क्षमता से अधिक काम करने के चक्कर में ना पड़ें. याद रखें, यदि आप अपनी क्षमता से बढ़कर काम करेंगे तो आपको कोई मेडल तो मिलेगा नहीं, गलतियों का खामियाजा ज्यादा भुगतना पड़ेगा. आज का जमाना टीमवर्क का है. इससे दूसरों के बारे में जानने समझने में तो मदद मिलती है साथ ही थकान व तनाव से भी राहत मिलती है. घर के काम में भी परिवार वालों की मदद ले.

पॉजिटिव सोच रखें

गलतियों के लिए आप जिम्मेदार हैं, इस भावना को मन से निकाल दें. इसी तरह दफ्तर में कोई प्रोजेक्ट हाथ से निकल गया हो, तो यह काम तो मैं कर नहीं सकती या मैं इसके लायक नहीं हूं. इस तरह के नकारात्मक विचार अपने दिमाग में ना आने दे.

निडर बनें

कई बार बचपन में माता-पिता से मिले व्यवहार की जड़े इतनी गहरी हो जाती हैं, कि वयस्क होने पर भी उनसे छुटकारा पाना मुश्किल हो जाता है. कुछ महिलाएं असंतुष्ट रिश्तो को सारी उम्र इसलिए बनाए रखती हैं, क्योंकि वह डरती है कि इन रिश्ते को तोड़ने से समाज में बदनामी होगी. लेकिन सच तो यह है कि आज के इस मशीनी युग में लोगों को इतनी फुर्सत ही कहां है, जो दूसरे के बारे में सोचे. सभी अपनी ही दुनिया में जीते हैं. इसी तरह यदि दफ्तर में भी बॉस से ताल मेल ना बिठा पा रही हों तो तबादला दूसरे विभाग में करवा लें. इससे आप राहत महसूस करेंगी.

प्रकृति से जुड़े

सुबह सूर्योदय से पहले उठे और घूमने जाएं. घूमने के लिए सामान्यतया उस स्थान को चुने जहां हरियाली अधिक से अधिक हो. जैसे नदी, तालाब, झरने, समुद्र, बाग-बगीचों में घूमने से मन मस्तिष्क को राहत महसूस होगी. खुली हवा दिमाग में सेरोटोनिन का स्तर बढ़ाती है और आप अच्छा महसूस करती हैं.

हर समस्या का समाधान ढूंढें

किसी भी परेशानी में हों, उसे सहजता से लें. हड़बड़ी से परेशानी और बढ़ जाती है, धैर्य रखकर प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करें. उन पहलुओं पर विचार करें, जिनसे आपकी समस्या का समाधान मिल सकता है.

दिनचर्या बदलें

रोज-रोज आप एक ही काम करके थक गई हैं. ऑफिस में भी बोरियत महसूस कर रही हैं, तो कुछ दिन बाहर घूम आए या परिवार समेत पिकनिक पर जाएं. स्पा लें, पार्लर जाएं. कभी-कभी छोटा सा गेट-टूगेदर भी मन को राहत देता है.

बोले कम सुने ज्यादा

यदि आप दूसरों की बात से सहमत नहीं है, तो भी बिना निर्णय लिए दूसरों की बात सुने कि वह क्या कह रहा है. उसे समझने की कोशिश करें और उसे एहसास दिलाने कि आप उसकी बात ध्यान से सुन रहे हैं.

स्वास्थ्य की कीमत समझे

स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को नजरअंदाज ना करें. सारे काम किए जा सकते हैं, लेकिन सारे काम एक बार में ही नहीं किए जा सकते. स्त्री परिवार का केंद्र भी है और परिधि. उसे मां पत्नी और वर्किंग वुमन बनने की जरूरत है सुपर वुमन बनने की नहीं.

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